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सीसीटीवी पर घर से ले जाती दिखी पुलिस, बाद में एनकाउंटर, एनएचआरसी ने मांगा जवाब

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प्रशांत शुक्ल

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 9 अगस्त की रात को लखनऊ के इंदिरा नगर निवासी पुलस्त तिवारी के साथ कथित मुठभेड़ के मामले में पुलिस से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है.

मानवाधिकार कार्यकर्ता और अधिवक्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने इस कथित एनकाउंटर के ख़िलाफ़ मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी.

25 हजार का ईनामी है पुलस्त

इसी महीने 9 अगस्त को लखनऊ पुलिस ने दावा किया था कि आशियाना थाना क्षेत्र में देर रात हुई मुठभेड़ में 25 हजार के इनामी बदमाश पुलस्त तिवारी को गिरफ्तार किया है, जिसके दाहिने पैर में गोली लगी है.

पुलिस के दावे के मुताबिक आशियाना पुलिस जोन-8 दफ्तर के पास चेकिंग कर रही थी, जहां पुलस्त बिना नंबर प्लेट की काले रंग की बाइक पर आया तथा पीछा करने पर उसने पुलिस पर गोली चला दी थी.

क्या और कैसे हुआ

डॉ. नूतन ने अपनी शिकायत में कहा कि पुलस्त की मां मंजुला तिवारी तथा परिवार वालों के अनुसार 09 अगस्त की शाम करीब 6.30 बजे दो पुलिस वाले उनके घर आये और वे पुलस्त को अपने साथ ले गए. इनमें एक आशियाना थाने के दरोगा महेश दुबे थे.

 

पुलस्त की बहन ने इस संबंध में पुलिस कमिश्नर के पीआरओ से भी फोन से बात की थी. पुलस्त के परिवार वालों के पास उसे ले जाते समय के सीसीटीवी रिकॉर्डिंग भी हैं. इसके विपरीत पुलिस ने उसी रात पुलस्त को भागता हुआ दिखा कर उसके पैर में गोली मार दी थी.

चार सप्ताह में अवगत कराने के निर्देश

आयोग ने शिकायत की प्रति लखनऊ पुलिस को प्रेषित करते हुए इस संबंध में की गयी कार्यवाही से चार सप्ताह में अवगत कराने का निर्देश दिया है.

उत्तर प्रदेश में एनकाउंटरों पर उठते रहे हैं सवाल

योगी आदित्यनाथ के साल 2017 में आने के बाद से यूपी पुलिस ने दो हज़ार से अधिक एनकाउंटर किए हैं जिनमें सौ से अधिक कथित अपराधी मारे गए हैं. इनमें से कई एनकाउंटरों पर गंभीर सवाल उठे हैं.

हाल ही में कानपुर के बिकरऊ कांड के मुख्य अभियुक्त विकास दुबे के एनकाउंटर पर भी गंभीर सवाल उठे थे. पुलिस ने विकास दुबे को मध्य प्रदेश से लाते वक़्त कानपुर के नज़दीक एक कथित एनकाउंटर में मार दिया था.

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